पंचर लगाने वाला हकीम कैसे बना? #mission_mauj_ley
जब दुश्मन विकास रोक दे तो हालत पंचर लगाने की आ जाती है।
विकास होता है पढ़ने से और सोसायटी के आला लोगों से हिकमत भरी अच्छी बातें सीखने से। उन पर अमल करने से।
एक साइकिल मिस्त्री का पंचर बनाने वाला लड़का अपनी लगन से इसी तरीक़े से ख़ुद विकास कर रहा था। एक दिन वह मुझसे मिला। मैंने उसे एक घंटे की मुलाक़ात में एक नज़रिया दिया कि
आप यूनानी और आयुर्वेदिक दवाओं की प्रैक्टिस करें। सिर्फ़ दो चार मर्ज़ों की दवा दें। वे दवाएं मैं आपको बता दूंगा।
वह तुरंत ही हकीम होने की भावना से भर गया और हिकमत की किताबें तलाश करने लगा।
एक दिन वह मुझे नुमाईश में मिल गया। उस वक़्त मैं एक आर्य समाजी बुक स्टाल पर खड़ा हुआ किताबें देख रहा था। मैंने वहाँ से बीस रूपए क़ीमत की एक किताब उठाकर उसे पढ़ने के लिए दी। वह किताब जड़ी बूटियों के नुस्ख़ों पर किसी सन्यासी की लिखी हुई है।
फिर मैंनै उसे हमदर्द और रैक्स रेमेडीज़ के प्रोडक्ट्स की किताबें दीं, जो ये कंपनियां हकीमों के लिए छापती हैं। इनमें उनकी हर दवा के फ़ायदे लिखे रहते हैं।
इस तरह उसने पढ़ा और वह दवाओं से कमाने लगा।
उसके हकीम बनने और मकान ख़रीदकर क्लीनिक करने का क़िस्सा बड़ा दिलचस्प है। किसी दिन सुनाऊंगा,
#इन्_शा_अल्लाह
इसमें सबसे मज़ेदार बात वह है, जब मैंने उसे अपने एक मित्र वैद्य गिरी जी के पास भेजा कि उनके साथ एक चैरिटेबल संस्था में संडे को दवा बाँटो ताकि अमली तजुर्बा मिले और एक दिन उसने चुपके से उनके नुस्ख़ों के पूरे रजिस्टर की फ़ोटो कापी ही करा ली।
उसने किसी से न पूछा और न बाद में बताया। उसमें सब बीमारियों के नुस्ख़े दर्ज हैं।
हर शहर में चैरिटेबल संस्थाएं हैं जो दवाएं देती हैं। आप वहाँ जाकर कुछ सीखना चाहें तो वे आपको सिखाएंगे।
:)
आपका विकास कोई आकर करे या न करे लेकिन आप ख़ुद अपना विकास करना चाहें तो कोई रोकेगा नहीं।
जो आपको पंचर लगाने वाला कहकर मज़ाक़ उड़ाए,
आप उसी की लिखी हुई किताब पढ़ो
और उसी के बराबर जाकर खड़े हो जाओ।

Comments
Post a Comment