एक आम आदमी चमत्कारी हकीम कैसे बना? #mission_mauj_ley
चमत्कारी हकीम वैद्य बनने वाले लोग पुराने बुज़ुर्गों का आदर करते हैं।
वे उनकी किताबों को बड़ी क़द्र से पढ़ते हैं जबकि दूसरे लोग उन्हें उठाकर भी नहीं देखते।
वे हिकमत (wisdom) से काम लेते हैं।
मैं आपको एक हकीम साहिब का वाक़या सुनाऊंगा तो आपको हंसी आएगी लेकिन उनकी हिकमत है बड़े काम की।
एक मदरसे में कलर्की करते करते एक बड़े मियाँ ने बुजुर्गों की लिखी हुई हिकमत की किताबें पढ़ लीं। वे किताबें मदरसे की लायब्रेरी में रखी थीं।
यूनानी और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से इलाज करने वाले पेट साफ़ करके ज़हरों (Toxins) को बाहर करते हैं।
राज़ की बात यह है कि अगर दस मरीजों के साथ यह काम कर दिया जाए तो दूसरी कोई दवा दें या न दें, तब भी चार छ: मरीज़ इसी काम से ठीक हो जाते हैं।
वह हकीम साहब सबको पेट साफ़ करने का नुस्ख़ा देने लगे। इससे पहले वह नब्ज़ देखने का ड्रामा भी करते थे हालांकि उन्हें नब्ज़ देखनी नहीं आती थी। इससे मरीज़ों को यक़ीन हो जाता था कि हकीम साहब मेरी बीमारी समझ गए हैं।
उनके इलाज से मरीज़ ठीक होने लगे तो उनकेे पास दूसरे शहरों के मरीज़ भी बढ़ने लगे। नए नए मरीज़ उनसे ऐसे सवाल करने लगे, जिनके जवाब उनके पास न थे। उन्होंने ऊँचा सुनने की एक्टिंग शुरू कर दी। लोगों ने उनसे फ़ालतू बात करनी बंद कर दी। हकीम साहिब ख़ुद भी फ़ालतू नहीं बोलते थे।
मेरे दोस्त हसीबुर्रहमान आज डाक्टर हैं। वह तब डाक्टर शमीम के मेडिकल कालेज में बीयूएमएस कर रहे थे। वह मुझे साथ लेकर उनके पास अपने इलाज के लिए गए। वह हकीम साहिब के तरीक़े और दवा से मुत्मइन न हुए। वह बोले मुझे मर्ज़ कुछ और है और यह दवा दे रहे हैं कुछ और। उन्होंने उनसे इलाज नहीं कराया।
हकीम साहब के घर के बाहर सौ सवा सौ लोग बैठे रहते थे। वह शुरू में रूपए नहीं लेते थे। बाद में लिए तो भी कम लिए।
दस बारह साल पहले वह पाँच या दस रूपए फ़ीस लेते थे और मरीज़ को नुस्ख़ा लिख देते थे। वह दवा चाहे जहाँ से ले ले।
नब्ज़ देखने की और ऊंचा सुनने की एक्टिंग करना उनकी हिम्मत और हिकमत की बात है।
ऐसा करके उन्होंने मरीजों की तसल्ली भी कर दी और ख़ुद को फ़ालतू सवालों से बचा लिया। ये सब सीखने की बातें हैं।
अल्लाह ने क़ुरआन पाक में फ़रमाया है कि शहद में शिफ़ा है।
हदीस में आया है कि सिबर (ऐलोवेरा) में शिफ़ा है।
नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हदीस में सना से पेट साफ़ करने की तालीम भी दी है।
शहद, ऐलोवेरा और सना बेहतरीन तरीक़े से पेट साफ़ करते हैं और जब इनमें त्रिफला और सहजन के पत्ते भी बढ़ा दिए जाते हैं तो जिस्म को कई फ़ायदे और भी मिलते हैं।
जिन लोगों को डायबिटीज़ हो, उन्हें बिना शहद के यह नुस्ख़ा दिया जाए। हालांकि असली शहद डायबिटीज़ के मरीज़ को दे सकते हैं लेकिन बाज़ार के प्रोडक्ट्स में चीनी की मिलावट ज़रूर होती है। इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ को बाज़ारी शहद न दें।
इस नुस्ख़े से मरीज़ को पोषण (nutrition) भी मिलता है और ज़हर भी उसके जिस्म से बाहर निकलते हैं।
एलोपैथी के डाक्टर पेट साफ़ किए बिना दवाएं देते हैं। आपको किसी मर्ज़ में एलोपैथी की दवा से फ़ायदा न हो तो आप ऊपर वाले नुस्ख़े से पेट साफ़ करें और
#talbinah खाएं।
जब भी आप पेट साफ़ करेंगे और परहेज़ करेंगे तो आप #शिफ़ा पाएंगे,
इन् शा अल्लाह।
आप फ़्री के नुस्ख़े लिखें तो आपके इस एक नुस्ख़े से आपके पास आने वाले आधे मरीज़ ठीक हो जाएंगे।
क़ब्ज़ को तक़रीबन सभी बीमारियों की जड़ समझें।
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