एक अनपढ़ आदमी के हकीम बनकर शहद त्रिफला से बीमारों को सेहतमंद बनाने और कमाने का सच्चा वाक़या

 बरसों पहले की बात है।

आप सुनेंगे तो हसेंगे लेकिन मैं यह स्टोरी उन लड़के लड़कियों की हिम्मत बढ़ाने के लिए बता रहा हूँ जो पढ़े लिखे हैं लेकिन वे कुछ बेचने से हिचकते हैं कि हम कैसे दवा बेच पाएंगे?

एक संस्था धर्म की पहचान कराती है। वह उसमें नए लड़कों को लगा लेती है क्योंकि बूढ़े उसमें फ़ील्ड वर्क के लिए भागदौड़ कर नहीं सकते। वह संस्था बूढ़ों को घर पर बैठकर दुआ करने का काम सौंप देती है।

ख़ैर उसमें किसी तरह एक कढ़ाई करने वाला दस्तकार नौजवान लड़का लग गया। वह तक़रीबन अनपढ़ था। फिर भी उसने पाँच छ: लोगों को धर्म की पहचान करा दी और एक शिक्षित युवा सन्यासी ने ख़ुद अपनी ख़तना भी कर ली।

इस वाक़ये से आप उस लड़के के जोश और कम्यूनिकेशन स्किल का अंदाज़ा लगा सकते हैं।

उस संस्था के गुरू जी ने एक दिन उस दस्तकार को मुझे सौंप दिया कि

आप इनकी आर्थिक स्थिति ठीक करो।

मैंने उसे कहा कि तुम जंगल से दो चार अजीब से पेड़ों की बड़ी बड़ी टहनियां लाकर अपनी दुकान के सामने डाल दो। लोग देखेंगे तो तुमसे पूछेंगे कि यह क्या है?

तुम बताना कि मैं देसी दवा बनाऊंगा। इसलिए मैं इन्हें सुखा रहा हूँ।

शुरू में लोग हसेंगे लेकिन तुम रोज़ यही करते रहना।

3 माह बाद लोगों के मन में यह बात जम जाएगी कि तुम हकीम हो और तुम दवा बनाते हो।

तब वे तुमसे दवा मांगेगे।

तुम उनकी बात मुझसे करा देना।

मैं तुम्हें नुस्ख़ा बता दूंगा।

तुम बाज़ार से यूनानी दवा ख़रीदकर उसका लेबल हटाकर और डिब्बा बदलकर उन्हें दे देना। उस दवा के साथ अपने पास से एक और दवा देना। तुम शहद में त्रिफला डालकर रख लेना। सौ दो सौ रूपए उसके ले लेना। इस तरह तुम्हें रूपए मिलने लगेंगे। तुम काम शुरू करो।

उस लड़के में बड़ी लगन थी। वह रोज़ एक मरीज़ से मेरी बात करा देता था। दो तीन महीने ऐसे ही चला। फिर उसके फ़ोन आने कम होते गए और फिर बंद ही हो गए।

ढाई तीन साल बाद एक दिन मुझे एक मरीज़ के बारे में उसका फ़ोन आया।

उसने हाल बताकर दवा जाननी चाही।

मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हें इस मरीज़ की दवा बाद में बताऊंगा। पहले तुम मुझे यह बताओ कि क्या तुमने मरीज़ों को दवा देना छोड़ दिया है?

उस लड़के ने कहा कि उस्ताद, मैं लगातार सबको दवा दे रहा हूँ। मेरा काम अच्छा चल रहा है। मुझे अच्छी कमाई हो रही है।

मैने कहा कि भाई जब तुम मुझसे कुछ पूछ नहीं रहे और मैं तुम्हें बता नहीं रहा हूँ तो तुम लोगों को दवा क्या दे रहे हो?

वह बोला कि उस्ताद आपने शहद में त्रिफला मिलाकर देना बताया था। मैं सबको वही दवा दे रहा हूँ।

मैंने हैरत से पूछा कि मर्दों को क्या देते हो?

वह बोला: त्रिफला।

मैंने पूछा कि औरतों को?

वह फिर बोला कि मैं औरतों की बीमारियों में भी त्रिफला ही दे रहा हूँ।

अच्छा, क्या उन्हें आराम मिल जाता है?

उसने बताया-उस्ताद, सबको आराम मिल जाता है। आज का केस ज़रा मुश्किल था। इसलिए मैंने आपसे सलाह करने के लिए आपको काल कर ली।

:) :) :)

मेरी हैरत हद पार कर गई।

या अल्लाह, शहद में त्रिफला मिलाकर देने से औरतों और मर्दों की सब बीमारियाँ दूर हो रही हैं!

अल्हम्दुलिल्लाह!

दोस्तो, मैंने यह पढ़ा था कि रोगों की जड़ पेट की ख़राबी और क़ब्ज़ है। जिसकी वजह से पेट में सड़न और ज़हर इकठ्ठे हो जाते हैं। पेट साफ़ कर दिया जाए तो रोग को शरीर ख़ुद दूर कर देता है। 

मैंने यह भी पढ़ा था कि आँवले में मौजूद विटामिन सी हर बीमारी से लड़ता है। शहद भी जिस्म को ज़रूरी मिनरल्स देता है और ज़हरों को बाहर करता है। मैंने सुना था कि शहद में शिफ़ा है और मैंने कुछ बीमारियों में शहद से फ़ायदा होते देखा है लेकिन यह तजुर्बा हैरतनाक है कि एक अनपढ़ अनाड़ी लड़का हर बीमार को शहद में सिर्फ़ त्रिफला मिलाकर देता रहा और उनकी बीमारी दूर होती रही।

इसलिए आप हिम्मत करें और हर्बल दवाएं सेल‌ करें। शिफ़ा देने वाला रब है। वह चाहे तो अनाड़ी के हाथ से सही दवा और शिफ़ा दे दे।

मेरी सलाह पर उस लड़के ने मदरसा बोर्ड लखनऊ के अपने शहर के सेंटर से फ़ार्म भरा और वह 10th के समकक्ष हो गया।

उसमें कान्फ़िडेंस और कम्यूनिकेशन स्किल इतना था कि वह कहता था कि उस्ताद, मैं गंजे को कंघा बेच सकता हूँ।

अगर आप ऐसा कर सकते हैं तो

आप आज के हालात में मज़े से सरवाईव कर सकते हैं।

जब आदमी एक मैदान में काम करता है तो वह उस मैदान के दूसरे लोगों के कांटेक्ट में आता है। वह लड़का एक एलोवेरा जूस बेचने वाली हर्बल कंपनी के कांटेक्ट में और उसने उस कंपनी का जूस बेचकर अच्छी कमाई की और उसकी आर्थिक हालत बहुत बेहतर हो गई। 


उसे किसी हकीम से डायबिटीज़ का एक नुस्ख़ा मिला। वह सौ रूपए की एक डोज़ देने लगा। उस दवा की एक बार में एक डोज़ दी जाती है। दूसरी और तीसरी डोज़ के बीच में कुछ हफ़्तों का फ़र्क़ रखा जाता है।

चीनी ज़्यादा खाकर और पैदल कम चलकर डायबिटीज़ के मरीज़ बढ़ते जा रहे हैं। डायबिटीज़ की दवा की मांग भी बढ़ती जा रही है। उसने दिल्ली और मुरादाबाद और रामपुर सब जगह वह जूस पिलाया और ख़ूब कमाया।

जिस धार्मिक संस्था से वह जुड़ा था। उससे जुड़े हुए लोगों को भी ऐलोवेरा जूस, डायबिटीज़ की दवा और शहद बेचा।

अब वह हकीम साहब कहलाता है और दवा पिलाता है। माल ख़ुद आता है।

मैंने उसे अपने छोटे भाई हकीम साहब से मिलवाया। उनका एक प्रोडक्ट उसे बेचने के लिए दिया। उसने आधा पेमेंट करके माल ले लिया। आधा पेमेंट माल बेचकर देने के लिए कहा।

इस बीच मेरे ख़िलाफ़ मेरे पेट भरे साथियों में एक बवंडर उठा कि अनवर भाई लोगों को कमाना सिखा रहे हैं जबकि हम और हमारे गुरू जी या मज़हबी आलिम लोगों को कमाना नहीं सिखाते। इसका मतलब यह है कि अनवर भाई सही रास्ते से भटक चुके हैं।

जब यह बवंडर उठा तो उसमें मेरे ख़िलाफ़ बोलने वाला यह हकीम भी था और इसने गुरू जी से कहा कि अनवर भाई ने मुझे धोखा दिया है। उन्होंने मुझे फ़ेसपैक में मिट्टी जैसा कुछ भरकर दिया है। यह कहकर इस मुख़लिस दीनदार हकीम जी ने मेरे भाई की रक़म मार ली। इनके बढ़िया मुख़लिस गुरू जी भी इनसे कभी दरयाफ़्त नहीं करते कि तुम किसी की रक़म मारकर तो नहीं बैठे हो?

हज़रते अक़दस बस दर्से क़ुरआन देते हैं।

ले दर्से क़ुरआन और दे दर्से क़ुरआन और यह कम पड़ जाए तो पढ़ नमाज़ आनलाईन। इसमें भी ख़ुत्बा लंबा सुन।

कभी दस बीस साल से साथ लगे हुए लोगों के हालात भी देखें कि ये अपने ऊपर एहसान करने वालों का शुक्र कर रहे हैं या नाशुक्री कर रहे हैं?

अगर शुक्र की सिफ़त में कमी पाएं तो उसे हिकमत से दूर करें क्योंकि हमारा मक़सद लोगों का धर्म बदलना नहीं है। सब लोग अपना धर्म अपनी आत्मा में लेकर पैदा हुए हैं और उनकी किताबों में मनु (आदम व नूह), इब्राहीम (ब्रह्मा जी), मूसा, ईसा और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि का नाम और तरीक़ा लिखा हुआ है। वे उस मूल धर्म को भूल गए हैं। हमें उन्हें उसी मूल धर्म को याद दिलाना है।

एक रब के नियमों के सामने समर्पण करके जीना और शुक्र करना इन सब महापुरुषों के धर्म की मूल शिक्षाएं हैं।

और ये सब नबी और महापुरूष खाना भी सिखाते थे और ख़ुद कमाकर दिखा गए हैं। जिससे पता चलता है कि ये सब लोग कमाना भी सिखा गए हैं।

हलाल (वैध) रोज़ी कमाना हरेक धर्म की बुनियाद है।

मैं सबको हलाल और वैध रोज़ी कमाना सिखाता हूँ। मेरी नज़र में यह दीनी काम है और दीन की सही समझ न रखने वालों की नज़र में यह दुनिया का काम है और इख़्लास (शुद्ध ह्रदयता) के ख़िलाफ़ है।

तुम्हें अपना इख़्लास और शुद्ध ह्रदय मुबारक हो।

मैं सब लोगों के पेट में रोटी देखना चाहता हूँ ताकि मेरा ईमान सलामत रहे।

मैं अपनी कमाई की रोटी दो चार लोगों में बांट सकता हूँ पूरे विश्व के भूखों में नहीं लेकिन मैं पूरे विश्व के भूखों को रब के नाम से और उसकी दी हुई आत्मा और बुद्धि से कमाना सिखा सकता हूँ।

सबका रब एक है।

हमें अच्छी आदतें बनानी हैं।

मैं दीन की ये सब बातें बताता हूँ लेकिन हमारा रब और हमारी अच्छी आदतें हमें परिवार का पेट पालने में कैसे सपोर्ट करती है?

मैं यह भी सिखाता हूँ।

जिस धर्मगुरु या पीर की तालीम बेरोज़गार, भूखे, बेघर, बीमार और ग़रीब लोगों का जीवन स्तर बेहतर न करे, वह अधूरी है।

दीन धर्म की अधूरी तालीम नेक लोगों की आर्थिक स्थिति बदतर करने की असल ज़िम्मेदार है।

तालीमे ग़िना (wealth education) हमारे मदरसों, स्कूलों, गुरूकुलों और मस्जिदों वगैरह में कम्पलसरी होनी चाहिए क्योंकि मैंने वेद, क़ुरआन और बाइबिल में यह एजुकेशन देखी है।

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