12 साल पुराना ल्यूकोरिया ख़त्म 1 दवा की सिर्फ़ 1 डोज़ से
मेरे पास एक बहन आई। उसने बताया कि वह 12 साल से ल्यूकोरिया की मरीज़ है। मैं अपने छोटे भाई को आत्मनिर्भरता की शिक्षा और प्रशिक्षण दे रहा था। इसलिए मैं हफ़्ते में एक दिन उनके क्लीनिक पर उनकी मदद करने के लिए सफ़र करके जाता था।
मैंने उस बहन को यूनानी दवाओं में से एक बेस्ट दवा लिख दी।
वह एक हफ़्ते बाद फिर क्लीनिक आई। उसने बताया कि उसे दवा से ज़रा सा भी फ़ायदा नहीं हुआ।
मैंने अपने उस्ताद डा. सैफ़ुल्लाह साहब को काल की, जो कि होम्योपैथी की दवा तब देते हैं जब उन्हें 'यक़ीन' हो जाए कि यह मरीज़ की बीमारी के लक्षणों से मेल खाती है। पोटेंसी भी वह ऊंची देते हैं क्योंकि वह इंसान के रूप में अल्लामा इक़बाल के शाहीन हैं। उनकी उड़ान ऊंची है।
उन्होंने कहा कि Calcaria phos. 1M दे दो।
मुझे अपने उस्ताद की क़ाबिलियत पर यक़ीन था। इस तरह उसमें यक़ीन की मात्रा डबल हो गई।
आज मेडिकल साईंस इस बात को प्लैसिबो (#placebo) के नाम से मानती है कि डाक्टर और मरीज़ का यक़ीन मर्ज़ को दूर करने में काम करता है।
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ज़िंदगी भर लोगों को यक़ीन से मर्ज़ से शिफ़ा पाना सिखाते रहे।
जिस दिन लोग अपने सबकॉन्शियस माइंड को रिप्रोग्राम करके यक़ीन से शिफ़ा और आरोग्य पाना सीख लेंगे, उस दिन दवाओं की ज़रूरत बहुत कम रह जाएगी। उनका जिस्म उनके फ़ूड को ही दवा में ख़ुद कन्वर्ट कर लेगी। इंसान का जिस्म दुनिया की सबसे बड़ी लैबोरेट्री से ज़्यादा केमिकल डेली पैदा करता है।
मैंने #रब का नाम लेकर उस बहन को
Calcaria phos. 1M की सिर्फ़ एक डोज़ दी।
अगले हफ़्ते आकर उसने बताया कि
उसका 12 साल पुराना ल्यूकोरिया ख़त्म हो गया है,
#अल्हम्दुलिल्लाह !


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